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EV: क्यों इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भारत सरकार की ये महत्वाकांक्षी योजना खटाई में जाती दिख रही है

मार्च-2022 तक दस लाख इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों की बिक्री का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत सरकार ने तय किया था वो अब खटाई में जाता दिख रहा है। गौरतलब है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को बढावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘फेम’ (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles) योजना की शुरुआत की थी जिसका पहला चरण 2015 में शुरु हुआ था और दूसरा 2019 में। इसके तहत भारत में ई-व्हीकल निर्माताओं को अलग-अलग तरीके से राहत देने की योजना तैयार की गई थी। लेकिन अभी तक ये पूरी कवायद पानी में जाती नजर आ रही है। सोसाइटी ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चर्स (SMEV) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ें तो यही कहते हैं।

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SMEV ने जानकारी साझा करते हुए कहा है कि जनवरी 2019 से अभी तक भारत में कुल 52,959 इकाई यूनिट की बिक्री हुई है जिसमें से केवल 31,813 वाहनों को ही FAME II योजना के तहत सब्सिडी मिली, क्योंकि शेष 21146 इकाइयां इसके लिए योग्य नहीं थीं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2020 में, हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में 25,735 इकाइयों की बिक्री हुई जो कैलेंडर वर्ष 2019 के आंकड़े 27,224 इकाई से 5.46% कम था।

हालांकि ई-वाहनों की बिक्री में आई इस कमी के पीछे कोविड-19 महामारी का भी हवाला दिया जा रहा है, जिसकी वजह से पूरे ही ऑटोसेक्टर को बड़ी चुनौती से जूझना पड़ा। लेकिन जानकारों की मानें तो इस स्थिति के पीछे खुद FAME II योजना के तहत लागू की गई शर्तें और नियमों की भूमिका ज्यादा रही है, जिनके चलते ग्राहकों ने ई-व्हीकल्स की बजाय पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर्स का चुनना ज्यादा उचित समझा। इस बारे में सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (SMEV) के डायरेक्टर जनरल ने बयान जारी कर कहा है कि FAME 2 योजना के तहत कई सारे प्रावधान जोड़ दिए गए जिन्हें समय से पहले या अनावश्यक रूप से प्रस्तुत किया गया। और इसी के परिणामस्वरूप हम घोषित लक्ष्यों का केवल 4% ही प्राप्त कर सके।

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