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जानिए किस साल तक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या हो जाएगी आधी, गडकरी ने जताई उम्मीद

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई है कि देश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों की संख्या में 2025 से पहले 50 प्रतिशत की कमी आएगी। सोमवार को देश के पहले सड़क सुरक्षा माह (National Road Safety Month) के उद्घाटन के समय दिए गए इस बयान में गडकरी ने ये भी कहा कि भारत में प्रतिदिन 415 लोग सड़कों पर मरते हैं, इनका जीवन बचाने में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। राजमार्ग मंत्री गडकरी के मुताबिक लोगों के जीवन को बचाने के कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे जोड़ा, ‘पिछले साल, स्वीडन में हुए एक सम्मेलन में भारत ने भी भाग लिया था, वहां 2030 तक भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को शून्य करने की एक अवधारणा पर विचार किया गया था। तमिलनाडु में हमारी ये कवायद सफल रही है, वहां दुर्घटनाओं और मौतों में 53 प्रतिशत की कमी आई है।”

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नितिन गडकरी ने कहा कि “2030 तक का इंतजार करने पर कम से कम 6-7 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं के कारण मौत के आगोश में समा जाएंगे, इसलिए हमें 2025 से पहले, देश में मौतों और दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी होगी। गडकरी ने यह भी कहा कि “सरकार सड़कों पर दुर्घटनाओं के लिहाज से सबसे जोखिम भर पॉइन्ट्स को तलाशने में 14,000 करोड़ खर्च करेगी। इसके लिए विश्व बैंक और एडीबी (एशियाई विकास बैंक) ने 7,000 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हम जल्द ही वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।”

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मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि मार्च के अंत तक, 40 किमी प्रतिदिन का सड़क निर्माण लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। गडकरी ने कहा, “इस बार, अब तक, हमने सड़क निर्माण के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। आज, हम प्रतिदिन 30 किमी सड़क निर्माण तक पहुंच चुके हैं … संभवत: मार्च के अंत तक, हम 40 किमी प्रति दिन के सड़क निर्माण तक पहुंच जाएंगे।”

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इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने इस बारे में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों से न केवल जीवन का नुकसान होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रहार होता है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह जैसे कार्यक्रम न केवल लोगों में विश्वास बढ़ाते हैं बल्कि जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

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वहीं, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री वी के सिंह ने कहा कि विभिन्न कारणों से हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क पर मर जाते हैं। बढ़ते हादसों पर लगाम लगाने के लिए मंत्रालय ने कई तरह की पहल की हैं। नीती आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ 85 प्रतिशत यात्री यात्रा करते हैं और 65 प्रतिशत माल सड़क मार्ग के जरिए ढोया जाता है। सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं की जांच करने के लिए विभिन्न पहल की हैं और केंद्र डार्क स्पॉट्स को कम करने के लिए भी काम कर रहा है। सड़क सुरक्षा माह के दौरान, स्कूल और कॉलेज के छात्रों, ड्राइवरों और अन्य सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के साथ विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करके सड़क दुर्घटनाओं के कारणों के बारे में जागरूकता और उन्हें रोकने के उपायों पर प्रकाश डाला जाएगा। इन गतिविधियों में बैनर, वॉकथॉन, रोड साइनेज और सड़क सुरक्षा से संबंधित पर्चे शामिल हैं।

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